29 Dec 2009

हमारा ”स्व“ या “आत्म” कई खण्डों वाली पुस्तक है




अपने आप को जानने-समझने के लिए धैर्य, सहनशीलता, जागरूकता चाहिये क्योंकि हमारा स्व या आत्म अनेक खण्डों वाले महाग्रंथ के समान है जो केवल एक ही दिन में नहीं पढ़ा जा सकता लेकिन यदि आप पढ़ना शुरू करें तो आपको इसका प्रत्येक शब्द, प्रत्येक वाक्य, प्रत्येक पैराग्राफ अपरिहार्य रूप से पढ़ना चाहिये क्योंकि इसके प्रत्येक शब्द, वाक्य और प्रत्येक पैराग्राफ में आपकी सम्पूर्णता के बारे में इशारे हैं। इसकी शुरूआत ही इसका अंत भी है। यदि आप जानते हैं कि कैसे पढ़ा जाता है तो आप परमज्ञान, परम समझदारी पा सकते हैं।

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