19 Apr 2014

एक अलग तरह का मन

हर आदमी कश्मकश और बखेड़ों से भरी जिंदगी.. निरंतर भागदौड़ हड़बड़ी और संघर्ष में फंसा है. इस जिंदगी का मतलब समझने के लिए किसी को भी पहले तो इस पर बौद्धिक रूप से पकड़ बनानी होगी और उसके बाद इससे उपजी समझ को व्यवहार में लाना होगा. चूंकि विचार पहले आता है यह बहुत जरूरी है कि वह सत्य या मौलिक, हमारा जाना—समझा विचार हो.. इसलिए आपको किसी समस्या का सामना स्पष्ट विश्लेषित मन के साथ करना होगा, पूर्वाग्रह से रहित, दिखावटी कोशिश और अंधविश्वास से मुक्त होकर... एक ऐसे मन सहित जो जांच परख कर, चीजों की जड़ तक जाने की सुदृढ़ इच्छा रखता हो ना कि सतह पर ही झाग या फेन की तरह फैले रहने की....

A different mind
In the confusion and turmoil of life, in its continual bustle and conflict, every individual is caught. To understand the meaning of it, o
ne must first grapple with it intellectually and afterwards put one's intellectual theories into practice... And since thought comes first, it very necessary that it should be true thought. Therefore you must approach the problem with a clear synthetic mind, free from prejudice, vanity and superstition - a mind that is willing to probe to the real root of things and not merely to skim the surface.

J. Krishnamurti Early Works, circa 1930


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9 Apr 2014

साध्य और साधन भिन्न या अलग नहीं होते

हम इतिहास का अध्ययन करते हैं और ऐतिहासिक तथ्यों का अपनी पूर्वधारणाओं के अनुसार अनुवाद कर लेते हैं, लेकिन भविष्य के प्रति सुनिश्चित होता एक भ्रांति है। मनुष्य केवल किसी एक प्रभाव का परिणाम नहीं है, वह व्यापक रूप से जटिल है ; और अन्य को न्यून आंकते हुए केवल किसी एक प्रभाव को बढ़ा-चढ़ा कर देखना एक असंतुलन पैदा करता है, जो हमें और भी अव्यवस्था और विपदाओं में ले जाएगा। मनुष्य एक संपूर्ण प्रक्रिया है। तो इस संपूर्णता को समझना ही होगा, ना कि इसका कोई एक हिस्सा... हालांकि चाहे कोई हिस्सा अस्थायी रूप से कितना ही महत्वपूर्ण क्यों ना हो। किसी भविष्य के लिए वर्तमान से समझौता करना उन लोगों का पागलपन है, जो सत्ता-शक्ति मिलने से पागल हैं और ताकत एक बहुत बड़ी बुराई है। ये लोग मानवता की दिशा तय करने के लिए खुद को सही साबित करने पर तुले रहते हैं, ये लोग नई तरह के पंडित हैं। साधन और साध्य अलग नहीं हैं, ये एक ही संयुक्त तथ्य है। साधन ही साध्य का सृजन करता है। हिंसा के द्वारा शांति नहीं हासिल की जा सकती। पुलिसिया व्यवस्था द्वारा नियंत्रित राज्य शांतिपूर्ण नागरिक नहीं पैदा कर सकता। विवश करके, आजादी हासिल नहीं की जा सकती। यदि कोई पार्टी संपूर्णतः शक्तिसंपन्न है, तो वह एक वर्गविहीन समाज की स्थापना नहीं कर सकती क्योंकि वर्गविहीन समाज किसी तानाशाही से नहीं पाया जा सकता। यह सब सहज ही समझ में आ जाना चाहिए। 


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1 Apr 2014

नवीन मौलिक की खोज


एक सीखा-सिखाया आदमी, चाहे वह कितना ही विद्वान या पंडित हो, विकिपीडिया से भरा हो.... अगर वह प्रेम-प्यार नहीं जानता, तो उसका सारा ज्ञान बकवास या व्यर्थ है.. वह केवल किताबी कीड़ा है। एक आदमी जो किसी तरह के विश्वास या श्रद्धा या मत के अनुसार, किसी धर्मसम्प्रदाय के हिसाब से चलने वाला है वह सीमित या बंधा होगा कहीं ना कहीं गुलाम होगा क्योंकि यदि किसी विश्वास के अनुसार ही अनुभव करता हो.. तो उसके अनुभव, कितने ही दिव्य अनुभव हों... उसे मुक्त नहीं करते। इसके विपरीत विश्वास, धर्म आधारित तथाकथित आध्यात्मिक अनुभव बांधते ही हैं। और सब तरह से मुक्त होना ही किसी नये, नवीन मौलिक की खोज में सहायक हो सकता है।

A man of learning, however erudite, however encyclopaedic his knowledge may be, if he has no love, surely his knowledge is worthless; it is merely book learning. A man of belief, as we discussed, must inevitably shape his life according to the dogma, the tenet, that he holds, and therefore his experience must be limited; because, one experiences according to one's beliefs, and such experience can never be liberating. On the contrary, it is binding. And, as we said, only in freedom can we discover anything new, anything fundamental.

J. Krishnamurti The Collected Works Volume V

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