24 Feb 2011

विकर्षित अवलोकन


जब आप किसी चीज को नाम देते हैं, तो आपके नामकरण की यह क्रिया, यह शब्द आपको अवलोकन से विकर्षित करता है, भटकाता है, आपके अवलोकन को दोषपूर्ण बनाता है। जब आप शब्द ‘बरगद’ का प्रयोग करते हैं, तो आप किसी वृक्ष को उस शब्द के माध्यम से देखते हैं, ना कि उस वृक्ष की वास्तविकता को। आप उस वृक्ष को उस छवि के माध्यम से देखते हैं जो आपने उस वृक्ष के बारे में बनाई हुई है,तो यह छवि, दृष्टि को बाधित करती है। इसी तरह यदि आप अपने को ही देखने की कोशिश करें, बिना अपनी कोई छवि बनाये, तो यह बड़ा ही अजीब और गहरे में विक्षुब्ध करने वाला होता है। जब आप गुस्से में, जब ईष्र्या में हों, तो इन अहसासों को बिना किसी अच्छी या बुरी श्रेणी में रखे, बिना किसी अहसास का नामकरण किये देेखें। क्योंकि जब आप इस अहसास को किसी अच्छी या बुरी श्रेणी में डालते हैं, या इसे नाम देते हैं तो आप आप वर्तमान के किसी क्षण को अतीत की स्मृतियों के माध्यम से देखते हैं। मुझे नहीं पता आपको यह सब समझ में आ रहा है या नहीं। कहने का तात्पर्य यह है कि किसी अहसास के वर्तमान में सामने आने पर, आप यथार्थतः किसी अहसास को ”जैसा वो है वैसा ना देखकर“, जब उसी तरह का कोई अन्य अहसास अतीत में पैदा हुआ था.... उस अहसास के बारे में अपनी इकट्ठा की गई स्मृतियों... उस अहसास के बारे में जो आपने जो कभी पढ़ा, सुना, लिखा, देखा है, उनके माध्यम से देखते हैं। साक्षात अवलोकन तब होता है, जब अवलोकन अतीत के माध्यम से नहीं हो रहा। इसी क्षण को इसी क्षण में देखा जा रहा हो।

Distraction from observation

When you name a thing, the very word acts as a distraction from observation. When you use the word 'cypress', you are looking at that tree through the word; so you are not actually looking at the tree. You are looking at that tree through the image that you have built up, and so the image prevents you from looking. In the same way, if you try to look at yourself without the image this is quite strange and deeply disturbing. To look when you are angry, when you are jealous, to look at that feeling without naming it, without putting it into a category. Because when you put it into a category or name it, you are looking at that present state of feeling through the past memory. I don't know if you are following this. So you are actually not looking at the feeling, but you are looking through the memory which has been accumulated when other similar types of feeling arose.

Talks with American Students, Chapter 4 1st Talk at Morcelo, Puerto Rico 14th September, 1968


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