18 Jan 2010

अकेले खड़े हो रहने में, सम्पूर्ण आजादी है



बिना किसी से जुड़े या बंधे हुए और निडर होकर, इच्छा को समझकर उससे मुक्त रहने..... इच्छा, जो कि भ्रमों की जननी है, उससे मुक्त रहने में आजादी है। अकेले रहने में ही असली और अनन्त शक्ति है। ज्ञान से ठुंसा हुआ, बंधनों में जकड़ा, नियोजित दिमाग कभी भी अकेला नहीं होता। जो धार्मिक या वैज्ञानिक या तकनीकी रूप से नियोजित हो वह सदैव सीमित होता है। सीमितता ही द्वंद्व का मुख्य घटक है। इच्छाओं में जकड़े आदमी के लिये सौन्दर्य एक खतरनाक चीज है।

Share/Bookmark

प्रकृति से सम्बन्ध



किसी मनुष्य की मौत से अलग, ...अंततः किसी पेड़ की मौत बहुत ही खूबसूरत होती है। किसी रेगिस्तान में एक मृत वृक्ष, उसकी धारियों वाली छाल, सूर्य की रोशनी और हवा से चमकी हुई उसकी देह, स्वर्ग की ओर उन्मुख नंगी टहनियां और तने.... एक आश्चर्यजनक दृश्य होता है। एक सैकड़ों साल पुराना विशाल पेड़ बागड़ बनाने, फर्नीचर या घर बनाने या यूं ही बगीचे की मिट्टी में खाद की तरह इस्तेमाल करने के लिए मिनटों में काट कर गिरा दिया जाता है। सौन्दर्य का ऐसा साम्राज्य मिनटों में नष्ट हो जाता है। मनुष्य चरागाह, खेती और निवास के लिए बस्तियां बनाने के लिए जंगलों में गहरे से गहरे प्रवेश कर उन्हें नष्ट कर चुका है। जंगल और उनमें बसने वाले जीव लुप्त होने लगे हैं। पर्वत श्रंखलाओं से घिरी ऐसी घाटियां जो शायद धरती पर सबसे पुरानी रही हों, जिनमें कभी चीते, भालू और हिरन दिखा करते थे अब पूरी तरह खत्म हो चुके हैं, बस आदमी ही बचा है जो हर तरफ दिखाई देता है। धरती की सुन्दरता तेजी से नष्ट और प्रदूषित की जा रही है। कारें और ऊंची बहुमंजिला इमारतें ऐसी जगहों पर दिख रही हैं जहां उनकी उम्मीद भी नहीं की जा सकती थी। जब आप प्रकृति और चहुं और फैले वृहत आकाश से अपने सम्बन्ध खो देते हैं, आप आदमी से भी रिश्ते खत्म कर चुके होते हैं।

Relationship with Nature

The death of a tree is beautiful in its ending, unlike man's. A dead tree in the desert, stripped of its bark, polished by the sun and the wind, all its naked branches open to the heavens, is a wondrous sight. A great redwood, many, many hundreds of years old, is cut down in a few minutes to make fences, seats, and build houses or enrich the soil in the garden. The marvellous giant is gone. Man is pushing deeper and deeper into the forests, destroying them for pasture and houses. The wilds are disappearing. There is a valley, whose surrounding hills are perhaps the oldest on earth, where cheetahs, bears and the deer one once saw have entirely disappeared, for man is everywhere. The beauty of the earth is slowly being destroyed and polluted. Cars and tall buildings are appearing in the most unexpected places. When you lose your relationship with nature and the vast heavens, you lose your relationship with man.
J. Krishnamurti Krishnamurti Foundation Trust Bulletin 56, 1989

Share/Bookmark