13 Nov 2009



क्या हमारी रोजमर्रा की जिन्दगी में कोई ऐसा तरीका हो सकता है जिसमें हम हर तरह के मनोवैज्ञानिक नियन्त्रण को मात्र अपने होने भर पर ही समाप्त कर दें? क्योंकि नियंत्रण का अर्थ है कोशिश - प्रयास जिसका मतलब है हमारा स्वयं को ही ‘‘नियंत्रक’’ और ‘‘नियंत्रित’’ के बीच में बांट देना। मैं गुस्से में हूं तो मुझे गुस्से पर काबू करना चाहिए, मैं सिगरेट पीता हूं तो मुझे सिगरेट नहीं पीनी चाहिए। हम कुछ और ही कहते हैं जो कि हमारे द्वारा ही गलत समझा जाता है और हमारे ही द्वारा शायद अस्वीकार भी किया जाता है और ये चीजें एकसाथ चलती हैं क्योंकि यह एक सामान्य सी उक्ति हो गया है कि सारी जिन्दगी एक निंयत्रण है- यदि आप नियंत्रण नहीं करते हैं तो आप अपने आप को ही बहुत छूट दे रहे हैं, आप असंवेदनशील हैं, आपके होने का कोई मतलब नहीं है, इसलिए आपको अपने पर काबू करना चाहिए। धर्म, दर्शन, शिक्षक, आपका परिवार, माँ बाप ये सब आपको प्रेरित करते हैं कि आपको अपने पर निंयत्रण करना चाहिए। हम कभी भी ये प्रश्न नहीं करते - कि ये नियंत्रक कौन है?   ................. आप खुद ही तो न।

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