12 Jan 2010

देखिये-समझि‍ये और सहज सरल रहिये



निश्चित ही जो खुद को सांसारिक राजनीति में खपा कर खो चुके हैं उनके लिये खुद को भीड़ से अलग करना ही नहीं समस्या नहीं अपितु जीवन में वापस लौटना, प्रेम में उतरना, सहज-सरल होना भी मुख्य कार्य है। प्रेम के बिना आप कुछ भी करें, आप कर्म की सम्पूर्णता को नहीं जान सकते, अकेला प्रेम ही आदमी को बचा सकता है। यही सत्य है श्रीमन हम लोग प्रेम में नहीं है, हम वास्तव में उतने सहज सरल नहीं रह गये हैं जितना हमें होना चाहिए क्यों? क्योंकि आप दुनियां को सुधारने, संवारने, जिम्मेदारियों, प्रतिष्ठा, सामने वाले से कुछ हटकर करने से, कुछ विशेष होने से सरोकार रखे हुए हैं। दूसरों के नाम पर आप अपने स्वार्थों के गर्त में डूबे हैं, आप अपने ही घोंघेनुमा कवच में समाए हैं। आप समझते हैं कि आप ही इस सुन्दर संसार का केन्द्र हैं। किसी वृक्ष, किसी फूल या बहती हुई नदी को देखने के लिए आप कभी भी नहीं ठहरते, और अगर कभी ठहर भी जाते हैं तो आपकी आंखों में मन में चलते हुए कई विचार, स्मृतियाँ और जाने क्या-क्या उतर आता है, बस आपकी आंखों में सौन्दर्य और प्रेम ही नहीं उमड़ता। पुनश्च यही सत्य है लेकिन एक व्यक्ति के करने के लिये क्या है? बस देखें-समझें और सहज-सरल रहें?

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