18 Nov 2009

मंत्र शब्द के अर्थ खो गये हैं





ध्यान क्या है? क्‍या यह दुनियाँ के शोर शराबे से पलायन है? क्‍या एक चुप्‍पा मन, एक शांति पूर्ण मन पाने की कोशिश है? इन सब प्रश्‍नों के बजाय.....आप पद्यतियों, विधियों का अभ्यास करते हैं जागरूक होने के लिए, अपने विचारों को नियंत्रण में रखने के लिए। आप आलथी-पालथी मार कर बैठ जाते हैं और किसी मंत्र को जपते हैं। ‘मंत्र’ शब्द का मूल अर्थ है कि ”कुछ होने का विचार मात्र भी न करना“, ”कुछ हो जाने के विचार मात्र से मुक्‍त रहना“,यह एक अर्थ है। ‘‘र्निदोष हो जाना’’ भी इसका अन्य अर्थ है, यानि सारी आत्मकेन्द्रित गतिविधियों को एक तरफ रख देना। यह मंत्र शब्द के मूल और वास्तविक अर्थ हैं। लेकिन हम दोहराते हैं, दोहराते हैं,.... अपने अहंकारपूर्ण उद्देश्यों, अपने स्वार्थों को सिद्ध करने के लिए जपे जाते हैं इस लिए मंत्र शब्द का अर्थ खो गया है।

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