25 Nov 2013

''सुख—आनंद'' का अनुसरण समाज की संरचना है


हम में से अधिकतर जाहिर या अप्रत्यक्ष रूप से सुख और आनंद के पीछे पड़े रहते हैं और यही सुख आनंद समाज की संरचना है। मैं सोचता हूं यह जानना महत्वपूर्ण है क्योंकि जन्म से लेकर मृत्यु तक, गहरे में, सबसे बचकर, शातिराना रूप से और स्पष्टत: दमखम ठोक कर भी हम खुशी—आनंद का अनुसरण करते हैं। वो चाहे भगवान के नाम पर हो या समाज के नाम पर या हमारी स्वयं की मांगों और त्वरित इच्छाओं के रूप में हो हम सुख—आनंद का पीछा करते हैं। और जब हम सुख आनंद का अनुसरण करते हैं, जो कि हम आसान आसानी से देख सकते हैं कि 'हम सब कर ही रहे हैं '' तो देखें अवलोकन करें कि इस अनुसरण पीछा करने में क्या निहित है...? मैं सुख चाहता हूं, मैं किसी सुख को पाना—पूरा करना चाहता हूं... अपनी महत्वाकांक्षा से, नफरत से, ईष्या—जलन से या ऐसे ही कई चीजों से— यदि यह मैं जानूं या अवलोकन करूं देखूं.. स्वयं अपने में--अपने लिए इस सुख—आनंद की प्रकृति क्या है... तब मुझमैं इसकी समझ आ सकेगी। अवलोकन करूं जब मैं इसे बहुत तार्किक रूप से, निर्दयतापूर्वक, पूर्णत: खुली आंखों से इसका अभिनय करूं...जिसमें कि महान भय और पीड़ा का मसौदा निहित है और वह अवस्था भी जहां मैं शांतिपूर्वक जी सकूं।

Pleasure is the structure of society

Most of us are pursuing, outwardly and inwardly, pleasure, and pleasure is the structure of society. I think it is important to find this out, because from childhood till death, deeply, surreptitiously, cunningly and also obviously, we are pursuing pleasure, whether it be in the name of God, in the name of society, or in the name of our own demands and urgencies. And if we are pursuing pleasure, which most of us are, which we can observe very simply, what is implied in that pursuit? I may want pleasure, I may want the fulfilment of that pleasure, through ambition, through hate, through jealousy, and so on—if I know, or observe, for myself, the nature and structure of pleasure then in the understanding of it I can either pursue it logically, ruthlessly, acting with fully open eyes though it involves a great deal of fear and pain—or come upon a state in which I can live in peace.
Talks & Dialogues Saanen 1967, p 48




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