7 Dec 2013

चयन चुनना या पसंद


चयन चुनना या पसंद होश में बाधक है क्योंकि पसंद हमेशा द्वंद्व का परिणाम होती है. जब आप किसी कमरे में प्रवेश करे तो, सारे फर्नीचर, कारपेट के होने या उसके ना होने को देखें.. ऐस ही बहुत कुछ.. बस देखें भर... इन सबके प्रति बिना किसी तरह के निर्णय के, अवलोकनपूर्ण भर रह पाना बहुत ही कठिन है. क्या आपने कभी कोशिश की किसी व्यक्ति, फूल, किसी विचार, किसी भाव को बिना पसंद—नापसंद.. बिना किसी निर्णयभाव से देखने की ?

Choice obviously prevents awareness because choice is always made as a result of conflict. To be aware when you enter a room, to see all the furniture, the carpet or its absence, and so on, just to see it, to be aware of it all without any sense of judgment is very difficult. Have you ever tried to look at a person, a flower, at an idea, an emotion, without any choice, any judgment?
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