31 Jan 2010

क्या कोई स्वयं की ही गतिविधियों का अवलोकन कर सकता है


क्या कोई ऐसा खोजी है, कोई ऐसा प्रश्नकर्ता है जो अपने बारे में अन्य लोगों द्वारा दी गई सारी सूचनाओं, सारे ज्ञान को पूर्णतः त्याग कर, अपने आपको जानने की कोशिश करे? क्या कोई ऐसा करेगा? कोई भी नहीं, क्योंकि यह बहुत ही सुरक्षित और आसान है कि हम प्रभुत्व स्वीकार लें। तब कोई भी अपने आपको सुरक्षित संरक्षित महसूस करता है। लेकिन यदि कोई पूर्णतः अन्य लोगों, किसी के भी प्रभुत्व प्रभाव को त्याग दे, तो कोई कैसे अपनी ही गतिविधियों का अवलोकन कर सकता है? क्योंकि स्वत्व कोई स्थायी चीज तो है नहीं है, यह निरंतर गतिशील है, जिन्दा है, कार्य कर रहा है। कोई उस चीज के बारे में कैसे देखे जाने... अवलोकन करे जो निरंतर आश्चर्यजनक रूप से अत्यंत गतिशील है, पूरे आग्रह के साथ, आकांक्षाओं, लोभ, रोमांस के साथ? जिसका तात्पर्य है - क्या कोई अपनी ही गतिविधियों का अवलोकन कर सकता है अपनी सभी इच्छाओं और भयों सहित, बिना अन्य लोगों से ज्ञान लिये या बिना उस ज्ञान के जो उसने अपने आप को जानने के लिए स्वयं ही इकट्ठा कर रखा है।

Can one observe the movement of the self?

One is a seeker, one is questioning; therefore one rejects completely all information provided by others about oneself. Will one do that? One will not, because it is much safer to accept authority. Then one feels secure. But if one does completely reject the authority of everybody, how does one observe the movement of the self? - for the self is not static, it is moving, living, acting. How does one observe something that is that is tremendously active, full of urges, ambitions, greed, romaticism? Which means: can one observe the movement of the self with all of its desires and fears, without knowledge acquired from others or which one has acquired in examining oneself?
J. Krishnamurti, Krishnamurti Foundation Trust, Bulletin 40


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