1 Apr 2014

नवीन मौलिक की खोज


एक सीखा-सिखाया आदमी, चाहे वह कितना ही विद्वान या पंडित हो, विकिपीडिया से भरा हो.... अगर वह प्रेम-प्यार नहीं जानता, तो उसका सारा ज्ञान बकवास या व्यर्थ है.. वह केवल किताबी कीड़ा है। एक आदमी जो किसी तरह के विश्वास या श्रद्धा या मत के अनुसार, किसी धर्मसम्प्रदाय के हिसाब से चलने वाला है वह सीमित या बंधा होगा कहीं ना कहीं गुलाम होगा क्योंकि यदि किसी विश्वास के अनुसार ही अनुभव करता हो.. तो उसके अनुभव, कितने ही दिव्य अनुभव हों... उसे मुक्त नहीं करते। इसके विपरीत विश्वास, धर्म आधारित तथाकथित आध्यात्मिक अनुभव बांधते ही हैं। और सब तरह से मुक्त होना ही किसी नये, नवीन मौलिक की खोज में सहायक हो सकता है।

A man of learning, however erudite, however encyclopaedic his knowledge may be, if he has no love, surely his knowledge is worthless; it is merely book learning. A man of belief, as we discussed, must inevitably shape his life according to the dogma, the tenet, that he holds, and therefore his experience must be limited; because, one experiences according to one's beliefs, and such experience can never be liberating. On the contrary, it is binding. And, as we said, only in freedom can we discover anything new, anything fundamental.

J. Krishnamurti The Collected Works Volume V

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