18 Jan 2010

अकेले खड़े हो रहने में, सम्पूर्ण आजादी है



बिना किसी से जुड़े या बंधे हुए और निडर होकर, इच्छा को समझकर उससे मुक्त रहने..... इच्छा, जो कि भ्रमों की जननी है, उससे मुक्त रहने में आजादी है। अकेले रहने में ही असली और अनन्त शक्ति है। ज्ञान से ठुंसा हुआ, बंधनों में जकड़ा, नियोजित दिमाग कभी भी अकेला नहीं होता। जो धार्मिक या वैज्ञानिक या तकनीकी रूप से नियोजित हो वह सदैव सीमित होता है। सीमितता ही द्वंद्व का मुख्य घटक है। इच्छाओं में जकड़े आदमी के लिये सौन्दर्य एक खतरनाक चीज है।

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