25 Nov 2009

Meditation and control ध्यान और नियंत्रण



In classical, ordinary meditation, the gurus who propagate it are concerned with the controller and the controlled. They say to control your thoughts because thereby you will end thought, or have only one thought. But we are inquiring into who the controller is. You might say, “It is the higher self”, “It is the witness”, “It is something that is not thought”, but the controller is part of thought. Obviously. So the controller is the controlled. Thought has divided itself as the controller and that which it is going to control, but it is still the activity of thought…
So when one understands that the whole movement of the controller is the controlled, then there is no control at all. This is a dangerous thing to say to people who have not understood it. We are not advocating no control. We are saying that where there is the observation that the controller is the controlled, that the thinker is the thought, and if you remain with that whole truth, with that reality, without any further interference of thought, then you have a totally different kind of energy.


This Light in Oneself, p 32

हि‍न्‍दी  : 
पारंपरिक शास्त्रीय, सामान्य ध्यान में किसी गुरू द्वारा उपजायी प्रक्रिया और जिसमें नियंत्रक और नियंत्रित से सरोकार होता है। गुरू कहता आपको अपने विचारों पर नियंत्रण करने को कहता है कि जिससे आप विचार को खत्म कर सकें या आखिरकार कोई एक विचार रह जाये। लेकिन हम इस बारे में पूछताछ गवेषणा कर रहे हैं कि नियंत्रक आखिरकार है कौन? आप कह सकते हैं, कि यह उच्चतम स्व या आत्म है, यह प्रत्यक्षदर्शी है, या यह विचार से इतर कोई चीज है। लेकिन जाहिर है नियंत्रक विचार का ही एक हिस्सा है। नियंत्रक ही नियंत्रित है। विचार ही खुद को नियंत्रक और नियंत्रित किये जाने वाले में बांट लेता है, लेकिन अंततः यह गतिविधि भी विचार की ही है।
तो जब कोई यह समझ जाता है कि नियंत्रक का ही सम्पूर्ण कार्यव्यवहार निंयत्रित भी है, तब वहां पर किसी तरह का नियंत्रण नहीं रह जाता। यह सब उन लोगों से कहना जो कि इसे नहीं समझते, एक बहुत ही खतरनाक चीज है।  हम नियंत्रण न करने की वकालत नहीं कर रहे हैं। हम यह कह रहे हैं कि जहां भी यह दिख रहा हो कि नियंत्रक ही नियंत्रित भी है, सोचने वाला ही विचार भी है.. और यदि आप इस सम्पूर्ण सत्य, इस वास्तविकता के साथ ही शेष रह सकते हैं, बिना अन्य किसी विचार के हस्तक्षेप के, तो आपके पास एक भिन्न प्रकार की ऊर्जा है।


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