24 Nov 2009

ध्यान कोई पद्धति नहीं है



ध्यान, सचेतन ध्यान नहीं है। क्या आप इसे समझ रहे हैं? यह किसी पद्धति का अनुसरण करता हुआ, किसी गुरू सामूहिक ध्यान, एकल ध्यान, या जेन या किसी अन्य पद्धति का अनुसरण करता हुआ सचेतन ध्यान नहीं है। यह पद्धति नहीं हो सकता क्योंकि तब आप अभ्यास , अभ्यास... अभ्यास करेंगे और आपका मस्तिष्क अधिकाधिक मंद होता जायेगा, अधिकाधिक मशीनी होता जायेगा। तो क्या कोई ऐसा ध्यान है जिसकी कोई दिशा नहीं है, जो सचेतन नहीं है.... ये ऐसा नहीं हो जो सुचिन्तित, इच्छित, सोचा-समझा, भली भांति विचार किया गया हो? तो इसे खोजिये।

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