31 Oct 2009

जो आप हैं, वही यह संसार है

हममे से बहुत से लोग इस भ्रमित और क्रूर जगत में अपनी ही एक सर्वथा निजी, एक ऐसी जिन्दगी गढ़ने की कोशिश करते हैं जिसमें वो खुश और शांतिपूर्वक बाकी दुनियां की अन्य चीजों के साथ चलते हुए जी सके। हमें ये लगता है या हम सोचते हैं कि रोजमर्रा की संघर्ष, द्वंद्व, पीड़ा और दुख की जो जिन्दगी हम जीते हैं वो दुर्भाग्यशली और भ्रमित बाहरी दुनिया से अलग है। हम सोचते हैं कि हमारा अपनी निजी दुनियां का ‘‘मैं’’ ... अत्याचार, युद्धों और दंगों, असमानता, अन्याय भरी बाकी दुनियां से से अलग है, जैसे ये सब हमारी विशेष निजी जिन्दगी से सर्वथा अलग है। लेकिन आप जरा और करीब से जानें, केवल अपनी जिन्दगी को ही नहीं बल्कि सारी दुनियां की जिन्दगी को देंखें तो आप जानेंगे कि आपकी रोजमर्रा की जिन्दगी, आप जो सोचते हैं, जो अनुभव करते हैं वही बाहरी दुनियां भी है, वही वह दुनियां है जो आपके बारे में ही कहती है।
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