2 Jan 2009

ध्यान जीवन के लिए अनिवार्य है

वास्तव में क्या सच है और क्या झूठ इसके लिए, प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष प्रभावांे की सभी समस्याओं को समझने के लिए हमें, आंतरिक और बाह्य उद्देश्यों के प्रभावों - अनुभवों के प्रभाव, ज्ञान के प्रभाव को समझना होगा। हमें अत्यांतिक अंर्तदृष्टि, एक गहरी सूझ-बूझ चाहिए जो है उसे वैसा ही (बिना किसी बात से प्रभावित हुए) देखने के लिए और इस सम्पूर्ण प्रक्रिया को ही ध्यान कहते हैं। ध्यान उसी तरह अनिवार्य है जैसे हमारा जीवन, दिनचर्या, और जीवन मंे खूबसूरती। खूबसूरती को खूबसूरती और कुरूप को कुरूप की देख सकने वाली चेतना चाहिए वर्ना आप खूबसूरत वृक्षों, शाम के सिन्दूरी आसमान और अनन्त विस्तार तक फैले क्षितिज में बादलों के झुरमुट में बैठे सूरज की खूबसूरती कैसे जान पाएंगे। सारी खूबसूरती और कुरूपता को जैसी वो है, वैसा ही देखने के लिए ध्यान की आंख चाहिए। हमारी सारी दिनचर्या में ध्यान चाहिए - सुबह जब हम दफ्तर या काम पर निकलते हैं, लड़ाई झगड़े करते हैं, तनाव, क्रोध, क्षोभ और गहरे डर को, प्रेम को, वासना को - इन सब बातों को समझने के लिए ध्यान अनिवार्य मूलभूत आवश्यकता है। हमारे अस्तित्व की संपूर्ण प्रक्रिया को - कौन सी बातें हमें प्रभावित करती हैं, किन बातों से हम तनाव में घिर जाते हैं, किन बातों को सुनसमझ महसूस कर हम फूल कर कुप्पा हो जाते हैं, किनसे दुख किनसे सुख मिलता साा लगता है इन सब बातों को जानने समझने का माध्यम है ध्यान। यह सम्पूर्ण देखना, जानना, बूझना समझना हमें समस्याओं से असत्य से मुक्त करता है और यथार्थ में प्रवृत्त यही ध्यान है।
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