16 Oct 2009

कि‍सी व्‍यक्‍ि‍त या वस्‍तु से जुड़ाव की प्रक्रिया

  • क्या मैं जो हो रहा है उसे त्वरित रूप से या तुरंत देख सकता हूँ?
  • माना कि मैं किसी वस्तु या व्यक्ति से जुड़ गया हूँ। लेकिन क्या मैंने उस विषय, वस्तु या व्यक्ति से जुड़ने से एकदम पूर्व के हालातों को देखा? इस जुड़ने में क्या-क्या शामिल था? और यह जुड़ाव कैसे पैदा हुआ, क्यों हुआ? क्या मैंने इस जुड़ने की घटना की सम्पूर्ण प्रकृति को देखा?
  • क्या मैं किसी वस्तु या व्यक्ति से इसलिए जुड़ा क्योंकि मैं अकेला था, मैं सुविधा चाहता था, मैं किसी पर निर्भर होना चाहता था या, क्योंकि मैं अपने आप के साथ ही नहीं रह पा रहा था? मैं साहचर्य चाहता था, मैं चाहता था कि मुझसे कहे कि ”बहुत अच्छे! बरखुरदार तुमने बहुत अच्छा किया!“,  मैं चाहता था कि कोई मेरा हाथ थाम कर चले जब मैं विषाद या क्रोध में  होऊं। इसलिए मैं किसी पर निर्भर था जिसके परिणामस्वरूप यह जुड़ना या जुड़ाव हुआ। इस जुड़ाव से भय प्रकट हुआ, ईष्र्या और फिर गुस्सा पैदा हुआ।
  • वैसे ही ; जैसे आप कोई प्रेमिका पा लें और फिर उससे अलगाव से भयभीत हों, उसके किसी से बात करने पर ईष्र्या प्रकट करें, और उसका अन्य व्यक्ति से जुड़ाव होने पर आपको गुस्सा आये।
  • तो क्या आप इस पूरी जुड़ाव की प्रक्रिया को, जब यह चल ही रही....हो ही रही हो... तुरंत देख सकते हैं?
  • आप इस पूरी प्रक्रिया को बिल्कुल देख सकते हैं - यदि आप होश से भरे हों और आपको,,, मन की हरकतों के बारे में जानने समझने में रूचि हो।

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