31 Jul 2009

जब केवल निपट प्रेक्षण होता है तभी जागरूकता होती है।

आप जानते हैं एकाग्रता एक प्रयास है, किसी विशेष पृष्ठ, एक विचारधारा, छवि, चिन्ह आदि पर ध्यान केन्द्रित करना आदि। एकाग्रता अपवर्जना की एक प्रक्रिया है। एकाग्रता किसी चीज को वर्जित कर अन्य पर ध्यान केन्द्रित करना है। आप किसी छात्र से कहते हैं खिड़की के बाहर मत देखो, अपनी किताब पर ध्यान दो। तो वो बाहर देखना चाहता है, पर किताब पर ध्यान केन्द्रित करने के लिए स्वयं को बाध्य करता है तो यहाँ एक द्वंद्व है। एकाग्रता का यह अविरत प्रयास, एक अपवर्जन (किसी चीज को वर्जित कर किसी अन्य में प्रवृत्त होना) प्रक्रिया है जिसका जागरूकता से कोई लेना देना नहीं है।
जब कोई प्रेक्षक होता है देखता है, यह आप भी कर सकते हैं, कोई भी कर सकता है। जब केवल चुनाव रहित प्रेक्षण होता है तो ही जागरूकता होती है। चुनाव सहित देखना, पूर्वाग्रह सहित देखना भ्रमित रहना और अ‘जागरूकता है।
Share/Bookmark